देवशयनी एकादशी 2026
कब से लगेगा शुभ कार्यों पर विराम और किस दिन से प्रारम्भ होंगे शुभ कार्य ?
देवशयनी एकादशी : शनिवार 25 जुलाई 2026
🌺 देवशयनी एकादशी 2026 🌺
🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🙏
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी का पावन पर्व शनिवार, 25 जुलाई 2026 को मनाया जाएगा।
📅 देवशयनी एकादशी: शनिवार, 25 जुलाई 2026
इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं तथा चातुर्मास का शुभारंभ होता है। सनातन धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। श्रद्धालु व्रत, जप, दान और भगवान विष्णु की आराधना करके पुण्य एवं आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करते हैं।
✨ देवशयनी एकादशी का महत्व ✨
🔹 भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
🔹 पापों का क्षय एवं पुण्य की वृद्धि होती है।
🔹 सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
🔹 चातुर्मास व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ होता है।
🔹 मोक्ष प्राप्ति के मार्ग प्रशस्त होते हैं।
इस तारीख से शुभ काम रुक जाएंगे जैसे, शादी #विवाह, #गृहप्रवेश, लग्न सगाई आदि।
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी #एकादशी कहा जाता है, पुराणों के अनुसार 4 महीनों के लिए भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं, इन 4 महीनों में विवाह आदि जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं, इसके बाद कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसे देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है, इस दिन भगवान विष्णु की योग निद्रा पूर्ण होती है।
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं. देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान विष्णु का शयनकाल प्रारम्भ हो जाता है इसीलिए इसे देवशयनी एकादशी कहते हैं. देवशयनी एकादशी के चार माह के बाद भगवान विष्णु प्रबोधिनी एकादशी के दिन जागतें हैं.
देवशयनी एकादशी प्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा के तुरन्त बाद आती है और अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार देवशयनी एकादशी का व्रत जून अथवा जुलाई के महीने में आता है. चतुर्मास जो कि हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार चार महीने का आत्मसंयम काल है, देवशयनी एकादशी से प्रारम्भ हो जाता है. देवशयनी एकादशी को पद्मा एकादशी, आषाढ़ी एकादशी और हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है.
एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं. एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है. एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अति आवश्यक है. यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है. द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना पाप करने के समान होता है.
🪔 एकादशी व्रत से जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का आगमन होता है। 🪔
पंडित कौशल पाण्डेय
ज्योतिष सलाहकार
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