Pandit Kaushal Pandey

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होलिका दहन वाले दिन करे यह चमत्कारी उपाय

 इस साल कब है होली? क्या है होलिका दहन का शुभ मुहूर्त, जान लें भद्रा काल
होली का शुभ मुहूर्त एवं होलाष्ठक :- पंडित कौशल पाण्डेय 09968550003
इस वर्ष 14  मार्च को होली का महापर्व मनाया जाएगा. यह त्यौहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है.

होलाष्टक:-  होलाष्टक का अर्थ होला+ अष्टक अर्थात होली से पूर्व के आठ दिन जिसे होलाष्टक कहा जाता है.जिसमे सभी शुभ कार्य वर्जित माने गए है। 
होलाष्टक 2025 कब से शुरू

होलाष्टक फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 7 मार्च 2025 से शुरू होंगे और फाल्गुन पूर्णिमा 13 मार्च 2027 पर समाप्त होगी. इस दिन होलिका दहन होगा और 14 मार्च 2025 को रंगवाली होली खेली

होलिका दहन का शुभ समय 
फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 13 मार्च को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर होगा. वहीं तिथि का समापन 14 मार्च को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट होगा, इसलिए होलिका दहन 13 मार्च को 2025 को किया जाएगा.

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
होलिका दहन के लिए भद्रा रहित प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि उत्तम मानी जाती है. वहीं इस बार 13 मार्च को भद्रा पूंछ शाम 06.57 मिनट से रात 08.14 तक रहेगा. इसके बाद भद्रा मुख का समय शुरू हो जाएगा जो रात 10.22 मिनट तक रहेगा. इसके बाद यानी रात 11 बजकर 26 से देर रात 12 बजकर 30 मिनट का समय उत्तम है. होलिका दहन के लिए करीब 1 घंटे का शुभ मुहूर्त है.



holoka dahan ke upay

होलिका दहन  वाले दिन करे यह चमत्कारी उपाय :-

नारियल के सखे गोले को बीच से काटकर उसमे तिल का तेल, काला तिल , 2 लोंग ,2 इलायची , कपूर मिलाकर ऊपर से नारियल के ढक्कन को बंद कर के शरीर के लम्बाई के बराबर धागा नापकर नारियल में बांध दे और जलती हुई होलिका की 7 बार परिक्रमा लगाकर उत्तर या पूर्व की तरफ मुँह कर के होलिका में गोला डाल दे ऐसा करने से घर में घर सुख शांति रहती है। 

साथ ही आज के दिन शरीर पर काली सरसो के उपटन से लेप लगाए और लेप के बाद तिल या सरसो का तेल लगाए और उपटन की मैल को आंटे की लोई में डालकर होलिका दहन में डाल देने से शरीर की व्याधि समाप्त होती है। 


होलिका कि पूजा क्यों –?
आज कल लोग होलिका की पूजा करते देखे जाते है जो हिन्दू धर्म के विपरीत है , जैसा कि हमारे धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि होलिका एक राक्षसी थी जिसे वर स्वरुप आग में न जलने का वरदान प्राप्त था लेकिन ईश्वर के खिलाफ जाने से वह तो जल गई और भक्त प्रह्लाद हरी नाम का सुमिरन करने के कारन आग से भी जिन्दा बच गए , इस लिए होलिका की पूजा न कर के भक्त प्रह्लाद के लिए पूजा करनी चाहिए , तभी से प्रति वर्ष यह पर्व भक्त प्रह्लाद की याद में इस दिन होलीका को जला कर मनाया जाता है.

भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए पूजन विधि
होलिका के समीप, पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ अपना मुख करके बैठे. भगवान विष्णु और अग्निदेव से प्रार्थना करके होलिका में आहूति दें.
फ़ूल-माला, रोली, चावल, गंध, पुष्प, कच्चे सूत, गुड़ हल्दी की गांठे, बताशे, नारियल आदि के द्वारा होलिका में अर्पित करे
इसके उपरांत कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर लपेटते हुए होलिका की तीन या सात बार परिक्रमा करें
और मन में कामना करे कि जिस प्रकार से भगवान विष्णु और अग्निदेव ने भक्त प्रह्लाद कि रक्षा ठीक वैसे ही हमारे मन मंदिर में ईश्वर के प्रति श्रद्धा विश्वास पैदा करे।
होलिका दहन के लिए लोग हरे भरे पेड़ों को काट कर होलिका में डाल देते है ऐसा नहीं करना चाहिए वृक्ष काटनेसे पर्यावरणकी हानि होती है ।
शास्त्रों में विधान मिलता है कि अरंडी के पेड़ को बीच में खड़ा करने के उपरांत सुखी लकड़िया और गोबर के उपले चारों तरफ डाल कर होलिका बनाना चाहिए या घर में लकड़ी के बेकार सामान आदि होलिका में जलाकर यह त्यौहार मानना चाहिए

होलिका दहन वाले दिन करे यह चमत्कारी उपाय
नारियल के सखे गोले को बीच से काटकर उसमे तिल का तेल, काला तिल , 2 लोंग ,2 इलायची , कपूर मिलाकर
ऊपर से नारियल के ढक्कन को बंद कर के शरीर के लम्बाई के बराबर धागा नापकर नारियल में बांध दे और जलती हुई होलिका की 7 बार परिक्रमा लगाकर उत्तर या पूर्व की तरफ मुँह कर के होलिका में गोला डाल दे ऐसा करने से घर में घर सुख शांति रहती है।

साथ ही आज के दिन शरीर पर काली सरसो के उपटन से लेप लगाए और लेप के बाद तिल या सरसो का तेल लगाए और उपटन की मैल को आंटे की लोई में डालकर होलिका दहन में डाल देने से शरीर की व्याधि समाप्त होती है।

भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए अग्निदेव पूजन विधि
होलिका के समीप, पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ अपना मुख करके बैठे. भगवान विष्णु और अग्निदेव से प्रार्थना करके होलिका में आहूति दें.
फ़ूल-माला, रोली, चावल, गंध, पुष्प, कच्चे सूत, गुड़ हल्दी की गांठे, बताशे, नारियल आदि के द्वारा होलिका में अर्पित करे
इसके उपरांत कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर लपेटते हुए होलिका की तीन या सात बार परिक्रमा करें
और मन में कामना करे कि जिस प्रकार से भगवान विष्णु और अग्निदेव ने भक्त प्रह्लाद कि रक्षा ठीक वैसे ही हमारे मन मंदिर में ईश्वर के प्रति श्रद्धा विश्वास पैदा करे।
होलिका दहन के लिए लोग हरे भरे पेड़ों को काट कर होलिका में डाल देते है ऐसा नहीं करना चाहिए वृक्ष काटनेसे पर्यावरणकी हानि होती है ।
शास्त्रों में विधान मिलता है कि अरंडी के पेड़ को बीच में खड़ा करने के उपरांत सुखी लकड़िया और गोबर के उपले चारों तरफ डाल कर होलिका बनाना चाहिए या घर में लकड़ी के बेकार सामान आदि होलिका में जलाकर यह त्यौहार मानना चाहिए.


होली कब 2025:
रंगवाली होली 14 मार्च 2025 शुक्रवार को है.
होलिका दहन 13 मार्च 2025 गुरुवार को है.
होलिका दहन मुहूर्त 13 मार्च को रात 11.26 - देर रात 12.30
फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 13 मार्च को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर शुरू होगी. 14 मार्च को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर होगा.

एक विनम्र निवेदन 
सभी देश वाशियों से निवेदन है की होली का त्यौहार भारतीय संस्कृति के अनुसार मनाये ,आज के दिन भांग या शराब का सेवन न करे , जिससे माहोल ख़राब हो। कई बार देखने में आया है की लोग नशे में धुत हो कर छेड़खानी करते है और ड्राइविंग करते है जिससे उनकी जान भी चली जाती है यह जीवन बहुत अनमोल है इसे ख़ुशी से जिए , होली भाईचारे का प्रतिक है इसे सरलता से मनाये।

भक्त प्रह्लाद को भगवान विष्णु ने ऐसे संभाला कि होलिका का वरदान ही उसके लिए श्राप बन गया! जिस अग्नि से उसे अभयदान प्राप्त था, वही अग्नि उसकी भक्षक बन गई! 
अतः भगवान विष्णु की शरण लें, उनका सहस्रनाम ब्रह्मांड में गूंजयमान करें ताकि वही आप पर बरसें, आपका कल्याण करें। 
वंदे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् 🙏
धन्यवाद

समस्त सनातन समाज को असत्य और अधर्म पर सत्य और भक्ति की जीत के प्रतीक पर्व होलिका दहन के पावन पर्व की आप सभी भक्तों को हार्दिक बधाई अनंत शुभकामनाएं।
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पंडित कौशल पाण्डेय
ज्योतिष,वास्तु शास्त्र राशि रत्न सलाहकार
राष्ट्रीय महासचिव -श्री राम हर्षण शांति कुंज,दिल्ली,भारत

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