Pandit Kaushal Pandey

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🌷 श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2024 🌷

🌷 श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2024  🌷
जानिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व कब और कैसे मनाये ?




भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी, दिन बुधवार, रोहिणी नक्षत्र एवं वृष राशि में हुआ था। 
आज के दिन जन्माष्टमी व्रत रखने का विधान है। इस व्रत को बाल, युवा, वृद्ध सभी कर सकते हैं। 
यह व्रत भारत वर्ष के कुछ प्रांतों में सूर्य उदय कालीन अष्टमी तिथि को तथा कुछ जगहों पर तत्काल व्यापिनी अर्थात अर्द्धरात्रि में पड़ने वाली अष्टमी तिथि को किया जाता है। सिद्धांत रूप से यह अधिक मान्य है। 

जिन्होंने विशेष विधि विधान के साथ वैष्णव संप्रदाय की दीक्षा ली हो, वे वैष्णव कहलाते हैं। 
अन्य सभी लोग स्मार्त हैं। परंतु इसका यह अर्थ नहीं है कि वे भगवान विष्णु की उपासना व भक्ति नहीं कर सकते। भगवान विष्णु की भक्ति साधना सभी लोग कर सकते हैं। लोक व्यवहार में वैष्णव संप्रदाय के साधु-संत आदि उदयकालीन जन्माष्टमी आदि के दिन ही व्रत करते हैं।


श्री कृष्ण जन्माष्टमी तिथि और शुभ मुहूर्त
सोमवार 26 अगस्त 2024 
उदय तिथि अनुसार श्री जन्माष्टमी व्रत  सोमवार 26 अगस्त 2024 को मान्य होगा 
 निशीथ पूजा मुहूर्त 
24:03:00 से 24:46:42 तक 
अवधि :0 घंटे 43 मिनट 
27, अगस्त को जन्माष्टमी व्रत पारणा मुहूर्त : प्रातः 05:52  के बाद 

व्रत कैसे करे :-
व्रत करने का अभिप्राय अपने को भूखा रखना नहीं है अपितु व्रत के दिन हम ईश्वर की कितना पूजा पाठ और नाम जप करते है यह व्रत कहलाता है। 

व्रती व्रत से पहले दिन अल्प भोजन करें तथा प्रातः काल उठकर स्नान एवं दैनिक पूजा पाठादि से निवृत्त होकर संकल्प करें कि मैं भगवान बालकृष्ण की अपने ऊपर विशेष अनुकंपा हेतु व्रत करूंगा, सर्व अंतर्यामी परमेश्वर मेरे सभी पाप, शाप, तापों का नाश करें।

 व्रती को ब्रह्मचर्य का पालन भी करना चाहिए पुरे दिन-रात काम,क्रोध,लोभ, मोह और अहंकार का त्याग कर निराहार या फलाहार व्रत करें और भगवान बाल कृष्ण के ध्यान, जप, पूजा, भजन-कीर्तन में बिताएं।
अगर इसमें कठिनाई हो तो बीच में फलाहार व दूध आदि ले सकते हैं। भगवान के दिव्य स्वरूप का दर्शन करें, उनकी कथा का श्रवण करें। उनके निमित्त दान करें अथवा उनके कीर्तन में, ध्यान में प्रसन्नचित्त होकर नृत्य आदि करें।

🙏🏻 ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार
 भारतवर्ष में रहने वाला जो प्राणी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करता है, वह सौ जन्मों के पापों से मुक्त हो जाता है। इसमें संशय नहीं है। वह दीर्घकाल तक वैकुण्ठलोक में आनन्द भोगता है। फिर उत्तम योनि में जन्म लेने पर उसे भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति उत्पन्न हो जाती है-यह निश्चित है।
🙏🏻 अग्निपुराण के अनुसार
 इस तिथिको उपवास करने से मनुष्य सात जन्मों के किये हुए पापों से मुक्त हो जाता हैं | अतएव भाद्रपद के कृष्णपक्ष की अष्टमी को उपवास रखकर भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करना चाहिये | यह भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाला हैं।
🙏🏻 भविष्यपुराण के अनुसार
 कृष्ण जन्माष्टमी व्रत जो मनुष्य नहीं करता, वह क्रूर राक्षस होता है।
🙏🏻 स्कन्दपुराण के अनुसार
 जो व्यक्ति कृष्ण जन्माष्टमी व्रत नहीं करता, वह जंगल में सर्प और व्याघ्र होता है।

चार रात्रियाँ विशेष पुण्य प्रदान करनेवाली हैं
1 दिवाली की रात 
2  महाशिवरात्रि की रात 
3 होली की रात और  4 कृष्ण जन्माष्टमी की रात इन विशेष रात्रियों का जप, तप, जागरण बहुत बहुत पुण्य प्रदायक है |

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की रात्रि को मोहरात्रि कहा जाता है। इस रात में योगेश्वर श्रीकृष्ण का ध्यान,नाम अथवा मन्त्र जपते हुए जागने से संसार की मोह-माया से मुक्ति मिलती है। जन्माष्टमी का व्रत व्रतराज है। इस व्रत का पालन करना चाहिए।

पंडित के एन पाण्डेय (कौशल)+919968550003 
ज्योतिष,वास्तु शास्त्र व राशि रत्न विशेषज्ञ 
राष्ट्रीय महासचिव -श्री राम हर्षण शांति कुंज,दिल्ली,भारत

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