Pandit Kaushal Pandey

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पवित्रा एकादशी (पुत्रदा एकादशी)

🌷 पवित्रा एकादशी (पुत्रदा एकादशी)  व्रत 🌷
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पवित्रा एकादशी (पुत्रदा एकादशी) स्मार्त संप्रदाय के लिए 23 अगस्त (रविवार) और वैष्णव संप्रदाय के लिए 24 अगस्त (सोमवार) को मनाई जा रही है। 

उदयातिथि के अनुसार मुख्य व्रत 23 अगस्त को रखा जाएगा, जबकि वैष्णव जन 24 अगस्त को व्रत रखेंगे।पवित्रा एकादशी की तिथि और मुहूर्तएकादशी तिथि प्रारंभ: 23 अगस्त 2026 को प्रातः 2:00 बजे से।एकादशी तिथि समाप्त: 24 अगस्त 2026 को प्रातः 4:18 बजे तक।
व्रत पारण (23 अगस्त वालों के लिए): 24 अगस्त को प्रातः 6:05 बजे से 7:45 बजे के बीच।


🌷 एकादशी व्रत के लाभ 🌷

➡️ 22 अगस्त मध्यरात्री 02:00 (यानि 23 अगस्त 02:00 AM तक) से 24 अगस्त प्रात: 04:18 तक एकादशी है।
💥 विशेष - 23 अगस्त 2026 रविवार को पुत्रदा- पवित्रा एकादशी (स्मार्त) एवं 24 अगस्त सोमवार को पुत्रदा- पवित्रा एकादशी (भागवत)

 24 अगस्त, सोमवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखे।

पुत्रदा एकादशी  नि:संतान दंपत्ति के लिए यह व्रत काफी लाभदायक बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत से व्रती को योग्य संतान की प्राप्ति होती है और मृत्यु के बाद स्वर्ग मे स्थान प्राप्त होता है।

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। प्रात: स्नान करके पूजन और उपवास करना चाहिए। भगवान विष्णु (शालिग्राम) को गंगाजल से स्नान कराकर भोग लगाना चाहिए। पूरे दिन भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए। भगवान नारायण के साथ लक्ष्मी जी की साधना भी करनी चाहिए। इस दिन बाल गोपाल की पूजा भी लाभकारी मानी जाती है।

👉क्यों रखते हैं पुत्रदा एकादशी का व्रत ❓

दरअसल इस व्रत के नाम के जैसा ही इससे प्राप्त होने वाला फल है। जिन व्यक्तियों को संतान होने में बाधाएं आती है अथवा जो व्यक्ति पुत्र प्राप्ति की कामना करते हैं उनके लिए पुत्रदा एकादशी का व्रत बहुत ही शुभफलदायक होता है। इसलिए संतान प्राप्ति के लिए इस व्रत को व्यक्ति विशेष को अवश्य रखना चाहिए, जिससे मनोवांछित फलों की प्राप्ति हो सके। इस व्रत के प्रभाव से संतान की रक्षा भी होती है। । इस व्रत की खास बात यह है कि यह स्त्री और पुरुष दोनों को समान रूप से फल देता है।

👉व्रत की कथा👇

भद्रावती नगर में राजा सुकेतुमान व उनकी पत्नी शैव्या निवास करते थे। इस दंपत्ति को कोई संतान नहीं थी। दोनों को दिन-रात यह चिंता सताती थी कि उनकी मृत्यु के बाद उन्हें अग्नि कौन देगा। इसी चिंता में दोनों दिन-रात दुखी रहते थे। एक दिन राजा दुखी मन से वन में गए। राजा को वन में प्यास लगी। कुछ दूर भटकने पर उन्हें एक सरोवर दिखा। सरोवर के पास पहुंचने पर राजा ने देखा कि वहां कुछ दूरी पर ऋषियों के आश्रम बने हुए हैं। वहां बहुत से मुनि वेदपाठ कर रहे थे। राजा ने सरोवर से पानी पीया। प्यास बुझाकर राजा ने सभी मुनियों को प्रणाम किया। ऋषियों ने राजा को आशीर्वाद दिया और बोले कि हम आपसे प्रसन्न हैं। राजा ने ऋषियों से उनके एकत्रित होने का कारण पूछा। तब उनमें से एक मुनि ने कहा कि वह विश्वदेव हैं और सरोवर के निकट स्नान के लिए आए हैं। राजा को ऋषियों ने बताया कि आज पुत्रदा एकादशी है, जो मनुष्य इस दिन व्रत करता है उसे संतान की प्राप्ति होती है। राजा ने मुनियों के कहे अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत आरंभ किया और अगले दिन द्वादशी को पारण (व्रत खोला) किया। व्रत के प्रभाव स्वरूप कुछ समय के पश्चात रानी गर्भवती हुईं और इन्हें योग्य संतान की प्राप्ति हुई।

👉 व्रत विधि :👇

-पूरे दिन उपवास रहकर शाम के समय कथा सुनने के बाद फलाहार करना चाहिए।

-इस दिन दीप दान करने का भी महत्व है।

-पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को व्रत से पूर्व यानी दशमी के दिन एक ही वक्त भोजन करना चाहिए। भोजन भी सात्विक करना चाहिए।

-व्रत के दौरान संयमित और ब्रह्मचर्य के नियम का पालन करना चाहिए।

-प्रात: स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेकर गंगा जल, तुलसी, तिल, फूल और पंचामृत से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।

-व्रत के अगले दिन द्वादशी पर किसी जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन कराकर, दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण (व्रत खोलना) करना चाहिए।

-संतान की इच्छा के लिए पति-पत्नी को प्रात:काल संयुक्त रूप से भगवान श्री कृष्ण की उपासना करनी चाहिए।

-इस दिन संतान गोपाल मंत्र का जाप करना लाभकारी होता है। 

तत्पश्चात् प्रसाद ग्रहण कर गरीबों और जरुरतमंदों को भोजन कराना और दक्षिणा देना चाहिए।

🙏🏻 जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।
🙏🏻 जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।
🙏🏻 एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं ।इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।
🙏🏻 धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।
🙏🏻 कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।

🙏🏻 परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है ।पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ ।भगवान शिवजी  ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।

एकादशी के दिन करने योग्य
एकादशी को दिया जलाके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें    .......
विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l

एकादशी के दिन सावधानी 
 महीने में १५-१५ दिन में  एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन जो  चावल खाता है... 
तो धार्मिक ग्रन्थ से एक- एक चावल एक- एक कीड़ा खाने का पाप लगता है...


🙏ओम नमो नारायणाय 🙏

अधिक जानकारी के लिए मिले अथवा संपर्क करे 
पंडित कौशल पाण्डेय (ज्योतिष,वास्तु,राशि रत्न सलाहकार)

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